CG News: छत्तीसगढ़ सरकार ने संत रविदास जंयती के अवार पर राज्य में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ये यह महत्वपूर्ण घोषणा की है।रायपुर। 03 अगस्त 2026 | छत्तीसगढ़ सरकार ने संत गुरु रविदास के सम्मान में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घोषणा की है कि अब से संत रविदास जयंती पर पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। सार्वजनिक अवकाश के अलावा छत्तीसगढ़ सरकार ने गुरु रविदास के नाम पर राज्य अलंकरण पुरस्कार शुरू करने का निर्णय लिया है।
आपको बता दें कि 2027 में रविदास जयंती 20 फरवरी को मनाई जाएगी यानी सरकार के आदेश के अनुसार 20 फरवरी को रविदास जयंती की छुट्टी रहेगी, इसके बाद से हर साल रविदास जयंती के दिन सरकारी छुट्टी रहेगी.
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह घोषणा राजधानी रायपुर में आयोजित प्रदेश स्तरीय कलश वंदन अभियान के दौरान की। कार्यक्रम में वाराणसी से लाई गई पवित्र मिट्टी वाले कलश का विधिवत पूजन एवं वितरण किया गया। इस अवसर पर विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, संत-महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
सीएम साय की दो महत्वपूर्ण घोषणाएं
मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने कहा कि संत गुरु रविदास का जीवन सामाजिक समरसता, समानता और मानवता का प्रतीक है। उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सरकार कई ऐतिहासिक कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार संत गुरु रविदास के विचारों और उनके सामाजिक योगदान को स्थायी सम्मान देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। उन्होंने घोषणा की कि अब संत रविदास जयंती पर पूरे छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक अवकाश रहेगा।
राज्य अलंकरण पुरस्कार की होगी शुरुआत
गुरु रविदास के नाम पर राज्य अलंकरण पुरस्कार शुरू किया जाएगा, जिसे हर वर्ष राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में संत रविदास का प्रेरक संदेश अंकित कराया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके विचारों से प्रेरणा ले सकें। इसके अलावा नवा रायपुर के एक प्रमुख चौक का नाम संत गुरु रविदास के नाम पर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन निर्णयों का उद्देश्य संत रविदास के समानता, समरसता और सामाजिक न्याय के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।
संत रविदास ने समानता का दिया संदेश
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि संत रविदास ने जात-पात से ऊपर उठकर समाज को एकता और समानता का संदेश दिया। राज्य सरकार उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि ऐसे महापुरुषों के आदर्शों से समाज में भाईचारा और सामाजिक समरसता मजबूत होगी। कार्यक्रम में मौजूद साधु-संतों और समाज के प्रतिनिधियों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया और इसे ऐतिहासिक कदम बताया।
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