Mahashivratri 2026: सनातन परंपरा में महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव के भक्तों के लिए अत्यंत पावन माना जाता है। मान्यता है कि इसी रात भगवान शिव और माता माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था। 2026 की महाशिवरात्रि को लेकर भक्तों में खास उत्साह देखा जा रहा है। आइए जानते हैं व्रत रखने की सही विधि, पूजा का क्रम और इस बार क्या रहेगा विशेष।
🔱 महाशिवरात्रि व्रत कैसे करें?
1️⃣ प्रातःकाल की तैयारी
ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें।
साफ-सुथरे या सफेद वस्त्र धारण करें।
घर के मंदिर या शिवालय की साफ-सफाई करें।
2️⃣ व्रत का संकल्प
हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करते हुए दिनभर उपवास रखें।
फलाहार या निर्जला व्रत, अपनी क्षमता अनुसार रखें।
🕉️ महादेव की पूजा-अर्चना की विधि
🔹 रात्रि जागरण का महत्व
महाशिवरात्रि में चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है। प्रत्येक प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है।
🔹 अभिषेक सामग्री
गंगाजल
कच्चा दूध
दही
शहद
घी
शक्कर
बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला)
धतूरा और आक का फूल
🔹 पूजा विधि क्रम
शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाएं।
पंचामृत से अभिषेक करें।
बेलपत्र अर्पित करें (ध्यान रखें पत्ते उल्टे न हों)।
धूप-दीप जलाकर आरती करें।
“महामृत्युंजय मंत्र” और “ॐ नमः शिवाय” का जप करें।
✨ 2026 में क्या है खास?
कई ज्योतिषियों के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि पर विशेष योग बन रहा है, जिससे व्रत और जप का फल कई गुना बढ़ सकता है।
सोमवार के दिन पड़ने पर इसका महत्व और भी बढ़ जाता है (सोमवार शिवजी का प्रिय दिन माना जाता है)।
शिवालयों में रुद्राभिषेक और भजन संध्या के भव्य आयोजन की तैयारी शुरू हो चुकी है।
🌙 व्रत का पारण कैसे करें?
अगले दिन प्रातः स्नान के बाद भगवान शिव को भोग लगाएं।
ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान दें।
प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलें।
📿 महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश
महाशिवरात्रि केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और संयम का पर्व है। यह दिन हमें अहंकार त्याग कर भक्ति और साधना के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
हर हर महादेव !
अगर आप भी इस वर्ष महाशिवरात्रि का व्रत रखने जा रहे हैं, तो पूरे विधि-विधान के साथ करें और शिव कृपा प्राप्त करें।


