PM Ujjwala Yojana: मोदी सरकार ने दिया गरीब परिवारों को बड़ा झटका, सब्सिडी वाले LPG सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दी है।
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PM Ujjwala Yojana) के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या में बड़ी कटौती कर दी है। अब योजना के लाभार्थियों को साल भर में केवल 4 सिलेंडरों पर ही सब्सिडी मिलेगी। इससे पहले यह संख्या 9 थी। सरकार के इस फैसले से करोड़ों गरीब परिवार प्रभावित हो सकते हैं, जो घरेलू रसोई गैस के लिए इस योजना पर निर्भर हैं।
⛽ पहले 12, फिर 9 और अब मिलेंगे केवल 4 सिलेंडर
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत गरीब परिवारों को धुएं से मुक्त रसोई उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। शुरुआत में लाभार्थियों को 12 सिलेंडरों तक सब्सिडी का लाभ मिलता था। बाद में इसे घटाकर 9 किया गया और अब सरकार ने इसे केवल 4 सिलेंडरों तक सीमित कर दिया है। हालांकि प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी जारी रहेगी, लेकिन यह केवल पहले चार रिफिल पर ही लागू होगी; बाकी सिलेंडरों पर सब्सिडी का फायदा नहीं मिलेगा।
सरकार ने क्यों घटायी सिलेंडरों से सब्सिडी?
सरकार का कहना है कि उज्ज्वला योजना के अधिकांश लाभार्थी साल भर में औसतन 4 से 5 सिलेंडरों का ही उपयोग करते हैं। इसी आधार पर सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या तय की गई है। अधिकारियों का दावा है कि इस बदलाव से सरकारी खर्च को कम करने में मदद मिलेगी और जरूरतमंद परिवारों तक योजना का लाभ पहुंचता रहेगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगाई का असर
एलपीजी गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार और तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती लागत और वैश्विक महंगाई का हवाला दे रही हैं। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है। इसी वजह से एलपीजी पर सब्सिडी का बोझ लगातार बढ़ रहा है।
करोड़ों परिवारों पर पड़ सकता है असर
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना देश की सबसे बड़ी सामाजिक कल्याण योजनाओं में से एक है। इस योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए थे। अब सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या घटने से इन परिवारों के घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ सकता है।
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विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने उठाए सवाल
सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गैस सिलेंडर पहले ही गरीब परिवारों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। ऐसे में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या कम करने से गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। आलोचकों का यह भी कहना है कि इससे कई परिवार दोबारा लकड़ी, कोयला और अन्य पारंपरिक ईंधनों का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
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