भिलाई : शिव शक्ति सेवा समिति द्वारा तीन दर्शन मंदिर के पास आयोजित सात दिवसीय श्रीशिव महापुराण कथा के पांचवें दिन कथावाचक पंडित युवराज पाण्डेय ने श्रद्धालुओं को भक्ति और ज्ञान का महत्व समझाया। कथा की शुरुआत 'ओम नमः शिवाय' के मंत्रोच्चार और 'ओघड़दानी गिरजा पति' जैसे भजनों के साथ हुई, जिससे पूरा पंडाल शिवमय हो गया।
कथा के मुख्य अंश:
- ज्ञान और संस्कार: पंडित जी ने कहा कि जिस व्यक्ति के पास जितना अधिक ज्ञान होता है, उसमें उतनी ही अधिक नम्रता होनी चाहिए। शिक्षा और धन के साथ अगर संस्कार न हों, तो व्यक्ति का पतन निश्चित है।
- माता सती और शिव प्रसंग: कथा के दौरान माता सती के जन्म और उनके विवाह की कथा विस्तार से सुनाई गई। महाराज ने बताया कि कैसे भगवान शिव दक्ष के अपमान के बाद भी विचलित नहीं हुए, क्योंकि वे सदैव आत्मज्ञान और 'राम' नाम के जाप में लीन रहते हैं।
- दक्ष का अहंकार: जब राजा दक्ष सभा में आए, तब ब्रह्मा और विष्णु सहित सभी खड़े हुए, लेकिन भगवान शिव ध्यानमग्न होने के कारण खड़े नहीं हुए। इसे दक्ष ने अपना अपमान समझा, जबकि शिव का मन तो सदैव परमात्मा में रमा रहता है।
- राम कथा का महत्व: पंडित युवराज ने शिव और राम के अभिन्न संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान शिव स्वयं आदि वक्ता हैं जिन्होंने पहली बार राम कथा माता पार्वती को सुनाई थी।
आयोजन की झलकियाँ
- कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे, जिनमें महिलाओं की संख्या काफी अधिक थी।
- समूह की महिलाओं ने कथा स्थल पर महाराज के साथ छायाचित्र भी खिंचवाए।
- कथा का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। विशेष : कथा 14 फरवरी तक जारी रहेगी। पंडित जी ने भक्तों से आग्रह किया कि वे जीवन में सावधानी और भक्ति का संतुलन बनाए रखें।
