अगर आपको भी घर में 5G सिग्नल नहीं मिलता था या फिर बेसमेंट में जाते ही नेटवर्क गायब हो जाता था, तो सरकार ने इस समस्या को सुलझा दिया है। दरअसल मोबाइल नेटवर्क के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड रेडिएशन लिमिट्स को बढ़ाकर ग्लोबल स्टैंडर्ड के बराबर करने की मंजूरी दे दी है। इससे एक टावर ज्यादा बड़े हिस्से तक कवरेज दे पाएगा। पहले यह क्षमता ग्लोबल स्टैंडर्ड के लिहाज से 10 गुना कम थी।
भारत में बढ़ते 5G यूजर्स की वजह से नेटवर्क कंजेशन और कॉल ड्रॉप की समस्याएं देखने को मिल रही थीं। इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है। दरअसल सरकार ने मोबाइल नेटवर्क के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड रेडिएशन लिमिट्स को बढ़ाकर ग्लोबल स्टैंडर्ड के बराबर करने की मंजूरी दे दी है। इससे टेलीकॉम कंपनियां कम मोबाइल टावर के बावजूद ज्यादा बड़े इलाके में 5G कवरेज दे पाएंगी। इससे आपको बेहतर नेटवर्क और इंटरनेट एक्सपीरियंस मिल सकेगा।
EMF लिमिट्स और सरकार का नया फैसला क्या है?
दरअसल कोई भी मोबाइल टावर सिग्नल भेजने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी यानी कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड का इस्तेमाल करता है। भारत में सुरक्षा के चलते इस फील्ड की सीमा को ग्लोबल स्टैंडर्ड के हिसाब से 10 गुना कम रखा गया था।
अब सरकार ने बढ़ते 5G ट्रैफिक और नेटवर्क की क्वालिटी को बेहतर करने के लिए इस सीमा को बढ़ाकर ग्लोबल स्टैंडर्ड के बराबर कर दिया है। इससे कंपनियां मौजूदा टावर्स की मदद से ज्यादा बड़े एरिया तक कवरेज दे पाएंगी।
क्या होगा फायदा?
सवाल उठता है कि इस फैसले से फायदा क्या होगा? दरअसल इसका सबसे बड़ा फायदा तो यही है कि कम टावरों के बावजूद मजबूत कवरेज देखने को मिलेगा। ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को अपनाने की वजह से अब एक ही टावर का सिग्नल ज्यादा दूर तक पहुंचेगा।
इससे घनी आबादी वाले इलाकों में नए टावर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी इसके अलावा जिन लोगों को घरों के अंदर, ऊंची इमारतों में, बेसमेंट आदि में 5G नेटवर्क नहीं मिलता था, वे भी अब मिलने लगेगा
यूजर्स को क्या फायदा?
दरअसल समय के साथ बड़ी संख्या में लोग 5G नेटवर्क पर शिफ्ट हुए हैं। ऐसे में नेटवर्क पर लोड बढ़ गया था और कॉल ड्रॉप या इंटरनेट स्पीड कम देखने को मिलने लगी थी। अब सिग्नल की क्षमता बढ़ने से यूजर्स को कॉइससेल ड्रॉप और बफरिंग से राहत मिलेगी इसमें पीक आवर्स में भी हाई-स्पीड 5G डेटा मिल सकेगा अगर आपको घर के अंदर सिग्नल न आने की समस्या होती थी, या फिर पार्किंग और बेसमेंट में नेटवर्क गायब हो जाता था, तो वह समस्या भी इससे सुलझेगी।
क्या स्वास्थय पर पड़ेगा असर
रिपोर्ट्स के अनुसार(REF.) सरकार ने सिग्नल की क्षमता को ग्लोबल स्टैंडर्ड के बराबर ही किया है। ये स्टैंडर्ड्स वही हैं जिन्हें अमेरिका, यूरोप और दुनिया के अधिकांश विकसित देश फॉलो करते हैं।WHO के अनुसार इन अंतरराष्ट्रीय तय सीमाओं के भीतर मोबाइल रेडिएशन स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।

